Monday, 28 May 2018

आपबीती! मुर्दाघर में काम करने वाले की, जानिए- कैसा होता है लाशों के बीच रहना

मॉर्चुरी के भीतर रहना किसी रेफ्रिजरेटर में बसने जैसा है. 'जितेंद्र चौहान' लगभग चार से पांच डिग्री तापमान पर रोज आठ से दस घंटे बिताते हैं.

from Latest News लाइफ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2xeR6si

Labels: ,

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home