
दिल्ली हाईकोर्ट ने शनिवार को अरविंद केजरीवाल सरकार का न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने मार्च 2017 के सभी श्रेणी के मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने वाले नोटिफिकेशन को संविधान के विरुद्ध बताया। कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर की बेंच ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी पर एडवाइजरी पैनल का यह नोटिफिकेशन प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। फैसला करने के पहले नियोक्ता इकाइयों का पक्ष नहीं सुना गया। यह बेहद जल्दबाजी में किया गया निर्णय है। नोटिफिकेशन के अनुसार अकुशल मजदूरों को 13500, अर्द्धकुशल मजदूरों को 14698 और कुशल मजदूरों को 16782 रुपए मासिक मजदूरी देना तय किया था। सरकार के फैसले खिलाफ कई औद्योगिक इकाइयों और कंपनियों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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