मशहूर शायर फैज की बेटी को कॉन्फ्रेंस में जाने से रोका, बेटे ने कहा- क्या यही है शाइनिंग इंडिया?
<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> मशहूर शायर फैज अहमद फैज की बेटी और शांति के क्षेत्र में काम करने वाली मोनीज़ा हाशमी को दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कॉन्क्लेव में शामिल होने से रोकने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. सोशल मीडिया पर जमकर इसकी आलोचना हो रही है. खास बात ये है कि इस मीडिया कॉन्क्लेव में सूचना प्रसारण मंत्रालय पार्टरनर थी. हालांकि अभी से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर किस वजह से उन्हें कांफ्रेंस में जाने से रोका गया. हालांकि सूत्रों का कहना है कि उनके पास कॉन्फ्रेंस वीजा नहीं था. उनके पास सिर्फ विजिटर वीजा था इसलिए उन्हें रोका गया.</p> <p style="text-align: justify;">शनिवार को अपने देश लौटीं 72 साल की मोनीजा ने अपने इस कटु दौरे पर कुछ भी बोलने से खुद को दूर रखा है. हालांकि, उन्होंने इतना जरूर कहा कि फैज फाउंडेशन ट्रस्ट दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्ते बनाने के लिए एक पुल का काम करता है. कॉन्क्लेव में शरीक होने से रोकने पर मोनीज़ा ने द टेलीग्राफ से कहा है कि फैज फाउंडेशन अमन को बढ़ावा देने पर काम करता रहेगा और भारत के लोगों को इसके लिए दावत दी जाती रहेगी. उन्होंने कहा, 'हमारे दिल अभी भी खुले हुए हैं'. जैसा की फैज ने कहा है, "लंबी है गम की शाम मगर शाम ही तो है."</p> <p style="text-align: justify;">आपको बता दें कि एशिया पैसिफिक इस्टीट्यूट फॉर ब्रॉडकास्टिंग डेवलपमेंट (AIBD) ने सूचना प्रसारण मंत्रालय के साथ मिलकर 15वां एशिया मीडिया समिट कराया था. AIBD का कहना है कि उन्हें दावत दी गई थी, लेकिन वो इसलिए कॉन्क्लेव में शरीक नहीं हो सकीं क्योंकि उन्हें दूसरे होटल में स्थानांतरित होना पड़ा था.</p> <code></code> <blockquote class="twitter-tweet" data-cards="hidden" data-lang="en"> <p dir="ltr" lang="en"><a href="https://twitter.com/PMOIndia?ref_src=twsrc%5Etfw">@PMOIndia</a> <a href="https://twitter.com/SushmaSwaraj?ref_src=twsrc%5Etfw">@SushmaSwaraj</a> This is your <a href="https://twitter.com/hashtag/ShiningIndia?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#ShiningIndia</a>?? My 72 year old mother, daughter of <a href="https://twitter.com/hashtag/Faiz?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Faiz</a> denied permission to participate in conference after being officially invited<a href="https://twitter.com/hashtag/Shame?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Shame</a><a href="https://t.co/9bnc0E2OZd">https://t.co/9bnc0E2OZd</a></p> — Ali Hashmi (@Ali_Madeeh) <a href="https://twitter.com/Ali_Madeeh/status/995313341974315008?ref_src=twsrc%5Etfw">May 12, 2018</a></blockquote> <p style="text-align: justify;">भारत की इस मेहमाननवाज़ी पर दोनों मुल्कों के अमन पर काम करने वाले एक्टिविस्ट ने अपनी नाराज़गी जाहिर की. मोनीजा के बेटे अली हाशमी ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने कहा, "क्या यही शाइनिंग इंडिया है. मेरी 72 साल की मां, फैज की बेटी को बुलाने के बाद भी कॉन्फरेंस में हिस्सा नहीं लेने दिया गया."</p> <p style="text-align: justify;">बता दें कि पिछले साल पाकिस्तानी फेमिनिस्ट कवियित्री किश्वर नहीद को दिल्ली में चल रहे जश्न-ए-रेख्ता कार्यक्रम को बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा था क्योंकि उन्हें बताया गया कि वो बतौर गेस्ट यहां पर आई हैं, प्रतिभागी नहीं हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कौन हैं फैज़ अहमद फैज़?</strong></p> <p style="text-align: justify;">फैज अहमद फैज पूरी दुनिया में अपने क्रांतिकारी शायरी के लिए प्रसिद्ध हैं. फैज ने पाकिस्तान में जनरल जिया उल हक की तानाशाही सरकार के खिलाफ खूब लिखा था. भारत हो या पाकिस्तान, दोनों ही जगह प्रतिरोध के मंच से फैज के शेरों को बुलंद आवाज में पढ़ा जाता है. 'निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन के जहां, चली है रस्म की कोई सर उठा के न चले' फैज के ये शब्द आज भी तानाशाही और जनविरोधी सरकारों के खिलाफ लड़ने की ताकत देते हैं.</p>
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